श्रद्धालु महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अब तक के सबसे बड़े समूह ने रविवार को केरल के सबरीमला मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उनका रास्ता रोक दिया.
मंदिर में प्रवेश की कोशिश करने वाली ये 11 महिलाएं 50 से कम उम्र की हैं और उनका संबंध दक्षिण भारत के अलग-अलग प्रदेशों से है.
इन महिलाओं को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई गई थी. लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें लगभग खदेड़ दिया जिसकी वजह से उन्हें पम्बा बेस कैम्प के पुलिस कंट्रोल रूम की ओर भागकर शरण लेनी पड़ी.
सुप्रीम कोर्ट दे चुका है प्रवेश की इजाज़त
चेन्नई स्थित मैनिती संस्था के बैनर तले ये महिलाएं पम्बा पहुंची थीं. मैनिती से जुड़ी सेलवी ने बीबीसी को बताया, "हमें वापस तमिलनाडु ले जाया जा रहा है. हमारे साथ पुलिस की तीन जीप और एक निगरानी वाहन है. अगर पुलिस सुरक्षा मुहैया नहीं करा सकती और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा का कोई इंतज़ाम नहीं है तो हमें लौटना ही पड़ेगा."
इन महिलाओं में से छह श्रद्धालु और पांच एक्टिविस्ट हैं. वे स्वामी अयप्पा के दर्शन के लिए सबरीमला मंदिर में प्रवेश करना चाहती थीं.
28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला की 150 साल पुरानी वो परंपरा ख़त्म कर दी गई जिसमें 10 से 50 साल की महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित था. लेकिन कई धार्मिक समूह और कुछ राजनीतिक पार्टियां देश के सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले को नहीं स्वीकार रही हैं.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से मंदिर में प्रवेश की कोशिश करने वाला यह महिलाओं का सबसे बड़ा समूह था.
राजनीतिक पार्टियों का रुख़
अक्टूबर से ही महिलाएं मंदिर में प्रवेश की कोशिशें कर चुकी हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का विरोध कर रहे श्रद्धालुओं का एक वर्ग उनका रास्ता रोकता रहा है. इसमें भारतीय जनता पार्टी से लेकर कई संस्थाओं के कार्यकर्ताओं के शामिल होने के आरोप भी लगे हैं.
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना कर चुके हैं. अक्टूबर में केरल के कन्नूर में ज़िला भाजपा कार्यालय के उद्घाटन के समय उन्होंने कहा था कि देश की अदालतों को व्यावहारिक होना चाहिए और वैसे ही फ़ैसले देने चाहिए, जिन्हें अमल में लाया जा सके.
Sunday, December 23, 2018
Wednesday, December 12, 2018
改革开放:读懂中国四十年变迁的五大问题
英国前首相布莱尔(Tony Blair,港译贝理雅)最近在《连线》(Wired)杂志的一次座谈会上形容中国迅速崛起是西方世界面临的“单一最大挑战”。有此想法的人如今在西方精英中绝非少数。
原美国五角大楼资深官员,现任国际著名智库威尔逊学者中心亚洲项目主任邓志强(Abraham Denmark)也在近期一次学术讲演中称:“中国爆炸性的经济增长是过去40年发生的单一最重大和影响深远的地缘政治事件。”
1978年12月18日至22日,中共决策层领导人聚集北京,参加了最终改变当代中国人命运的一次重大会议——中共第十一届三中全会。会议被普遍认为是中国改革开放的起点。随之而来的一系列改革,让中国从温饱难保、民不聊生,一路成为世界第二大经济体。
当年究竟为什么要改革开放?改了些什么?哪些没改?未来中国又去向何方?在中国纪念改革开放40年的时候,世界也在关注这些问题。
从窑洞到巅峰:习近平思想的发展历程
贸易战与国进民退论下 解读习李对民企释出的讯号
观点:习近平考察广东后面临抉择
一片噤声中人大近全票通过修宪 海内外学者表忧虑批评
习近平谈改革开放 淡化港澳政治?
改革开放前的中国什么样?
西方对中国1970年代的印象很简单。有位英国年青女歌手Katie Melua写过一首名为“北京的九百万辆脚踏车”的流行歌。歌词唱道:北京有九百万辆脚踏车,那是事实,无人能否认的事实……
对上了点儿年纪的中国人来说,她的歌词很容易让人联想起改革开放之前的中国。经历过毛泽东时代的人都会记得,那时的中国是毛一人说了算、肃杀一切的社会,在国际上几乎完全孤立,国民经济也挣扎在联合国绝对贫困线。联合国统计数据显示,1978年的中国人均年国民产值仅为229美元,在每天不到1美元的绝对贫穷线下。
原美国五角大楼资深官员,现任国际著名智库威尔逊学者中心亚洲项目主任邓志强(Abraham Denmark)也在近期一次学术讲演中称:“中国爆炸性的经济增长是过去40年发生的单一最重大和影响深远的地缘政治事件。”
1978年12月18日至22日,中共决策层领导人聚集北京,参加了最终改变当代中国人命运的一次重大会议——中共第十一届三中全会。会议被普遍认为是中国改革开放的起点。随之而来的一系列改革,让中国从温饱难保、民不聊生,一路成为世界第二大经济体。
当年究竟为什么要改革开放?改了些什么?哪些没改?未来中国又去向何方?在中国纪念改革开放40年的时候,世界也在关注这些问题。
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一片噤声中人大近全票通过修宪 海内外学者表忧虑批评
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西方对中国1970年代的印象很简单。有位英国年青女歌手Katie Melua写过一首名为“北京的九百万辆脚踏车”的流行歌。歌词唱道:北京有九百万辆脚踏车,那是事实,无人能否认的事实……
对上了点儿年纪的中国人来说,她的歌词很容易让人联想起改革开放之前的中国。经历过毛泽东时代的人都会记得,那时的中国是毛一人说了算、肃杀一切的社会,在国际上几乎完全孤立,国民经济也挣扎在联合国绝对贫困线。联合国统计数据显示,1978年的中国人均年国民产值仅为229美元,在每天不到1美元的绝对贫穷线下。
Sunday, December 9, 2018
उर्दू प्रेस- बीजेपी पाक विरोधी और मुसलमानों की दुश्मन: इमरान ख़ान
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का इमरान ख़ान के नाम एक ख़त और इमरान ख़ान का एक इंटरव्यू सुर्ख़ियों में रहा.
सबसे पहले बात अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ख़त की.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार व्हाइट हाउस ने इस बात की पुष्टि कर दी ही कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को एक ख़त लिखा है.
अख़बार के व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्यॉरिटी काउंसिल के प्रवक्ता ने इस बात की तो पुष्टि कर दी है कि ट्रंप ने इमरान ख़ान को एक ख़त लिखा है, लेकिन ख़त में क्या लिखा है इसकी कोई ख़ास जानकारी नहीं दी है.
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने केवल इतना कहा कि ट्रंप ने इमरान ख़ान से अपील की है कि वो अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया में पूरा सहयोग दें. प्रवक्ता के अनुसार ट्रंप ने अपने ख़त में लिखा है कि अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया में पाकिस्तानी मदद पाकिस्तान और अमरीका के संबंधों के लिए बुनियादी अहमियत रखती है और पाकिस्तान में वो सामर्थ्य है कि वो अपनी धरती पर तालिबान के ठिकाने न बनने दे.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान के लिए अमरीका के विशेष दूत ज़िलमे ख़लीलज़ाद ने इमरान ख़ान से मुलाक़ात की.
ख़लीलज़ाद ने अमरीकी राष्ट्रपति का संदेश देते हुए इमरान ख़ान से कहा कि अफ़ग़ानिस्तानी संकट के सियासी हल के ज़रिए पूरे क्षेत्र में शांति बहाल करने के साझे उद्देश्य को हासिल करने के लिए अमरीका पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करना चाहता है.
अख़बार लिखता है कि इमरान ख़ान ने ट्रंप के इस ख़त का स्वागत किया है.
अख़बार जंग के अनुसार पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने इमरान ख़ान के रवैये की जमकर तारीफ़ की. क़ुरैशी ने कहा कि इमरान ख़ान पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति से दो टूक बात की.
अमरीकी राष्ट्रपति के ख़त का ज़िक्र करते हुए अख़बार लिखता है, "राष्ट्रपति ट्रंप ने एक साल पहले ही दक्षिण एशिया को लेकर अपनी नीति स्पष्ट कर दी थी, लेकिन अब हमें 'डू-मोर डू-मोर' कहने वालों ने ही हम से मदद मांग ली है."
इस मौक़े पर शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान अपनी भूमिका निभाएगा.
उन्होंने कहा कि वो 15 दिसंबर को काबुल जा रहे हैं जहां चीन और अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्रियों से मुलाक़ात करेंगे.
इमरान ख़ान ने अमरीका के अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट को इसी हफ़्ते एक इंटरव्यू दिया है. पाकिस्तान के सभी अख़बारों में उस ख़ास इंटरव्यू की चर्चा हो रही है.
अख़बार जंग ने इमरान के उस इंटरव्यू के हवाले से हेडिंग लगाई है, "पाकिस्तान अब किराए की बंदूक़ नहीं बनेगा. अमरीका से चीन जैसा संबंध चाहते हैं."
इसी इंटरव्यू के हवाले से अख़बार नवा-ए-वक़्त ने सुर्ख़ी लगाई है, "किसी के सामने झुकेंगे नहीं. न किराए के क़ातिल हैं, न अमरीका के बंदूक़. बनेंगे."
सबसे पहले बात अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ख़त की.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार व्हाइट हाउस ने इस बात की पुष्टि कर दी ही कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को एक ख़त लिखा है.
अख़बार के व्हाइट हाउस के नेशनल सिक्यॉरिटी काउंसिल के प्रवक्ता ने इस बात की तो पुष्टि कर दी है कि ट्रंप ने इमरान ख़ान को एक ख़त लिखा है, लेकिन ख़त में क्या लिखा है इसकी कोई ख़ास जानकारी नहीं दी है.
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने केवल इतना कहा कि ट्रंप ने इमरान ख़ान से अपील की है कि वो अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया में पूरा सहयोग दें. प्रवक्ता के अनुसार ट्रंप ने अपने ख़त में लिखा है कि अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया में पाकिस्तानी मदद पाकिस्तान और अमरीका के संबंधों के लिए बुनियादी अहमियत रखती है और पाकिस्तान में वो सामर्थ्य है कि वो अपनी धरती पर तालिबान के ठिकाने न बनने दे.
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान के लिए अमरीका के विशेष दूत ज़िलमे ख़लीलज़ाद ने इमरान ख़ान से मुलाक़ात की.
ख़लीलज़ाद ने अमरीकी राष्ट्रपति का संदेश देते हुए इमरान ख़ान से कहा कि अफ़ग़ानिस्तानी संकट के सियासी हल के ज़रिए पूरे क्षेत्र में शांति बहाल करने के साझे उद्देश्य को हासिल करने के लिए अमरीका पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करना चाहता है.
अख़बार लिखता है कि इमरान ख़ान ने ट्रंप के इस ख़त का स्वागत किया है.
अख़बार जंग के अनुसार पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने इमरान ख़ान के रवैये की जमकर तारीफ़ की. क़ुरैशी ने कहा कि इमरान ख़ान पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति से दो टूक बात की.
अमरीकी राष्ट्रपति के ख़त का ज़िक्र करते हुए अख़बार लिखता है, "राष्ट्रपति ट्रंप ने एक साल पहले ही दक्षिण एशिया को लेकर अपनी नीति स्पष्ट कर दी थी, लेकिन अब हमें 'डू-मोर डू-मोर' कहने वालों ने ही हम से मदद मांग ली है."
इस मौक़े पर शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान अपनी भूमिका निभाएगा.
उन्होंने कहा कि वो 15 दिसंबर को काबुल जा रहे हैं जहां चीन और अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्रियों से मुलाक़ात करेंगे.
इमरान ख़ान ने अमरीका के अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट को इसी हफ़्ते एक इंटरव्यू दिया है. पाकिस्तान के सभी अख़बारों में उस ख़ास इंटरव्यू की चर्चा हो रही है.
अख़बार जंग ने इमरान के उस इंटरव्यू के हवाले से हेडिंग लगाई है, "पाकिस्तान अब किराए की बंदूक़ नहीं बनेगा. अमरीका से चीन जैसा संबंध चाहते हैं."
इसी इंटरव्यू के हवाले से अख़बार नवा-ए-वक़्त ने सुर्ख़ी लगाई है, "किसी के सामने झुकेंगे नहीं. न किराए के क़ातिल हैं, न अमरीका के बंदूक़. बनेंगे."
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