Sunday, December 23, 2018

सबरीमला: मंदिर में प्रवेश की महिलाओं की एक और कोशिश नाकाम

श्रद्धालु महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अब तक के सबसे बड़े समूह ने रविवार को केरल के सबरीमला मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उनका रास्ता रोक दिया.

मंदिर में प्रवेश की कोशिश करने वाली ये 11 महिलाएं 50 से कम उम्र की हैं और उनका संबंध दक्षिण भारत के अलग-अलग प्रदेशों से है.

इन महिलाओं को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई गई थी. लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें लगभग खदेड़ दिया जिसकी वजह से उन्हें पम्बा बेस कैम्प के पुलिस कंट्रोल रूम की ओर भागकर शरण लेनी पड़ी.

सुप्रीम कोर्ट दे चुका है प्रवेश की इजाज़त
चेन्नई स्थित मैनिती संस्था के बैनर तले ये महिलाएं पम्बा पहुंची थीं. मैनिती से जुड़ी सेलवी ने बीबीसी को बताया, "हमें वापस तमिलनाडु ले जाया जा रहा है. हमारे साथ पुलिस की तीन जीप और एक निगरानी वाहन है. अगर पुलिस सुरक्षा मुहैया नहीं करा सकती और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा का कोई इंतज़ाम नहीं है तो हमें लौटना ही पड़ेगा."

इन महिलाओं में से छह श्रद्धालु और पांच एक्टिविस्ट हैं. वे स्वामी अयप्पा के दर्शन के लिए सबरीमला मंदिर में प्रवेश करना चाहती थीं.

28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला की 150 साल पुरानी वो परंपरा ख़त्म कर दी गई जिसमें 10 से 50 साल की महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित था. लेकिन कई धार्मिक समूह और कुछ राजनीतिक पार्टियां देश के सर्वोच्च न्यायालय के फ़ैसले को नहीं स्वीकार रही हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से मंदिर में प्रवेश की कोशिश करने वाला यह महिलाओं का सबसे बड़ा समूह था.

राजनीतिक पार्टियों का रुख़
अक्टूबर से ही महिलाएं मंदिर में प्रवेश की कोशिशें कर चुकी हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का विरोध कर रहे श्रद्धालुओं का एक वर्ग उनका रास्ता रोकता रहा है. इसमें भारतीय जनता पार्टी से लेकर कई संस्थाओं के कार्यकर्ताओं के शामिल होने के आरोप भी लगे हैं.

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना कर चुके हैं. अक्टूबर में केरल के कन्नूर में ज़िला भाजपा कार्यालय के उद्घाटन के समय उन्होंने कहा था कि देश की अदालतों को व्यावहारिक होना चाहिए और वैसे ही फ़ैसले देने चाहिए, जिन्हें अमल में लाया जा सके.

No comments:

Post a Comment